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बौद्ध धर्म में उत्तम व्यक्ति की व्याख्या (Anaṅgaṇa Sutta)

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नमो बुद्धाय! सभी उपासक एवं उपसिकाओं को मेरा नमस्कार। दोस्तों! बौद्ध धम्म के अनुसार इस लोक (संसार) में चार तरह (प्रकार) के व्यक्ति होते हैं। कौन से चार? पहला, वह व्यक्ति होता है जो अपने चित्त में मल सहित होता हुआ भी यह ठीक से नहीं जानता कि उसके चित्त में मल ( राग, द्वेष, मोह , ये तीन प्रकार के चित्तमल अथवा अंगण) है। दूसरा, वह व्यक्ति होता है, जो अपने चित्त में मल होने पर जानता है कि उसके चित्त में मल है। तीसरा, वह व्यक्ति होता है, जिसका चित्त निर्मल होता है पर वह नहीं जानता कि वह निर्मल चित्त वाला है। चौथा, वह व्यक्ति है, जिसका चित्त निर्मल होता है और वह यह बात अच्छी तरह से जानता है कि उसका चित्त पूर्णतः निर्मल है। इन चारों तरह के व्यक्तियों में पहले दो व्यक्तियों जिनके चित्त में मल है, में से जो व्यक्ति यह ठीक से नहीं जानता कि उसके चित्त में मल है वह उन दोनों तरह के व्यक्तियों में हीन माना जाता है, क्योंकि जब उसे ठीक से पता ही न होगा कि उसके चित्त में मल है तो वह अपने चित्त को परिशुद्ध करने का कोई प्रयास ही नहीं करेगा और ऐसे में वह राग-युक्त, द्वेष युक्त और मोह ...

बुद्ध के मूल सिद्धांत

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नमो बुद्धाय ! बुद्ध के उपदेशों को समझने के पूर्व निम्न लिखित चार मूल सिद्धांतों को जानना अत्यंत आवश्यक है। इन चार मूल सिद्धांतों में तीन स्वीकारात्मक एवं एक अस्वीकारात्मक हैं, ये सिद्धांत हैं -  ईश्वर को न मानना (अनिश्ववाद); "मनुष्य स्वयं अपना मालिक है" - इस सिद्धांत का विरोध होगा (अस्वीकारात्मक सिद्धांत)। आत्मा को नित्य नहीं मानना; अन्यथा नित्य एक रस मानने पर उसकी परिशुद्धि और मुक्ति के लिए गुंजाइश नहीं रहेगी। किसी ग्रंथ को स्वतः प्रमाण नहीं मानना; अन्यथा बुद्धि और अनुभव की प्रामाणिकता जाती रहेगी। जीवन - प्रवाह को इसी शरीर तक परिमित न मानना; अन्यथा जीवन और उसकी विचित्रताएं कार्य- कारण नियम से उत्पन्न न होकर सिर्फ आकस्मिक घटनाएं रह जाएंगी। बौद्ध धर्म (धम्म) में इस चार सिद्धांत सर्वमान्य हैं। बुद्ध की शिक्षा और दर्शन इन चार सिद्धांतों पर अवलंबित है। पहले तीनों सिद्धांत बौद्ध धर्म को दुनिया के अन्य धर्मों से पृथक करते हैं। ये तीनों सिद्धांत जड़वाद और बुद्ध धम्म में समान हैं। किंतु चौथी बात, अर्थात जीवन - प्रवाह को इसी शरीर तक परिसीमित न मानना, इसे भौतिकवाद यानी जड़त्व से पृथक करत...

बौद्ध धर्म : एक परिचय (Buddhism : An Introduction)

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नमो बुद्धाय! सम्यक लेखन ब्लॉग के नए लेख हेतु आपका स्वागत है। जैसा कि मैं आपको पहले ही पिछले लेख में कह चुका हूं कि बौद्ध धर्म के बारे में जानकारियाँ उपलब्ध करवाने वाला हूँ अतः उसी चरण में मेरा ये प्रयास पुनः आपके समक्ष है। दोस्तो!  प्रायः आपने सुना होगा, बौद्ध धर्म एक धर्म नहीं है, जीवन जीने का सन्मार्ग है या केवल एक प्रायोगिक सोच है या महज बुद्ध की शिक्षा मात्र है। वैसे आप इनमें से जो भी कुछ मानें, बौद्ध धर्म ये सब कुछ है। यहाँ जीवन को सही तरीके से जीने की शिक्षा भी मिलेगी और खुद में तर्क करने, प्रयोग करने का सिद्धांत भी। बौद्ध धर्म के बारे में और कुछ बताने से पहले मैं आपको वेबस्टर्स न्यू वर्ल्ड कॉलेज डिक्शनरी में दी गई धर्म की परिभाषा के बारे में बताना चाहता हूं। धर्म - वेबस्टर्स न्यू वर्ल्ड कॉलेज डिक्शनरी के अनुसार, किसी दिव्य या अलौकिक शक्ति / शक्तियों पर विश्वास करना एवं ब्रम्हांड के निर्माता और शासक की पूजा करना ही धर्म कहलाता है।  वैसे धर्म क्या है, इसकी परिभाषा प्रति व्यक्ति अलग अलग हो सकती है।  बौद्ध धर्म में दिव्य या अलौकिक शक्ति (परमेश्वर), ब्रम्हांड के ...

सम्यक लेखन : एक नई पहल (Samyak Lekhan: A beginning)

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नमो बुद्धाय! दोस्तों! काफी समय बाद एक नए ब्लॉग के साथ फिर हिन्दी ब्लॉगिंग जगत के दरवाजे पर खड़ा हुआ हूँ। पर, " सम्यक लेखन ", एक और नया ब्लॉग.. वो भी इतने दिनों बाद, आखिर क्यों..? ये सवाल जरूर आपके मन में जरूर आया होगा, यदि आप मेरे पुराने पाठकों में से एक होंगे तो...। वैसे मैंने शुरुआत से ही हिन्दी ब्लॉगिंग को आगे बढ़ाने की बात कही है, जिस पर मैंने अपने ब्लॉग जगत के तत्कालीन जाने माने हिन्दी ब्लॉगर्स के साथ मिल कर " हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड " नामक ब्लॉग की शुरुआत भी की थी। पर समय का पहिया ऐसा घूमा कि मैंने लिखना बंद सा ही कर दिया। हालांकि लिखता तो मैं अब भी हूँ पर अब ब्लॉगिंग नहीं करता। पर एक कसक सी थी कि ब्लॉगिंग छोड़ के मैंने शायद गलत किया है, उस ही गलती को सुधारने और अपनी तेज गति से भागती ज़िन्दगी में आध्यात्म के सहारे ठहराव लाने की एक कोशिश में आज फिर एक नए ब्लॉग के साथ आपके सामने आया हूँ। "सम्यक लेखन", इसमें "सम्यक" शब्द का अर्थ है "सही"। और इस ब्लॉग के एड्रेस (samyakbuddhism.blogspot.com) से आप समझ ही गए होंगे कि इस दफा मैं जो लिखने ...