बौद्ध धर्म : एक परिचय (Buddhism : An Introduction)

नमो बुद्धाय!
सम्यक लेखन ब्लॉग के नए लेख हेतु आपका स्वागत है। जैसा कि मैं आपको पहले ही पिछले लेख में कह चुका हूं कि बौद्ध धर्म के बारे में जानकारियाँ उपलब्ध करवाने वाला हूँ अतः उसी चरण में मेरा ये प्रयास पुनः आपके समक्ष है।


दोस्तो! 
प्रायः आपने सुना होगा, बौद्ध धर्म एक धर्म नहीं है, जीवन जीने का सन्मार्ग है या केवल एक प्रायोगिक सोच है या महज बुद्ध की शिक्षा मात्र है। वैसे आप इनमें से जो भी कुछ मानें, बौद्ध धर्म ये सब कुछ है। यहाँ जीवन को सही तरीके से जीने की शिक्षा भी मिलेगी और खुद में तर्क करने, प्रयोग करने का सिद्धांत भी। बौद्ध धर्म के बारे में और कुछ बताने से पहले मैं आपको वेबस्टर्स न्यू वर्ल्ड कॉलेज डिक्शनरी में दी गई धर्म की परिभाषा के बारे में बताना चाहता हूं।

धर्म - वेबस्टर्स न्यू वर्ल्ड कॉलेज डिक्शनरी के अनुसार, किसी दिव्य या अलौकिक शक्ति / शक्तियों पर विश्वास करना एवं ब्रम्हांड के निर्माता और शासक की पूजा करना ही धर्म कहलाता है। 

वैसे धर्म क्या है, इसकी परिभाषा प्रति व्यक्ति अलग अलग हो सकती है। 

बौद्ध धर्म में दिव्य या अलौकिक शक्ति (परमेश्वर), ब्रम्हांड के निर्माता या शासक जैसे शब्द कहीं नहीं मिलेंगे। इसके तहत आप बौद्ध धर्म को अनिश्वरवादी भी कह सकते हैं। यहां तक कि बुद्ध ने स्वयं को भी किसी दिव्य शक्ति या उनका अवतार कहने से इनकार ही किया है। बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं में मानव जीवन के हर पहलू को सूक्ष्मता से समझाया है। जिससे आप उनके मार्ग पर चल कर जन्म एवं मृत्यु के चक्र से बाहर निकल सकते हैं।

बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं में किसी भी तरह के अंध विश्वास, कर्मकाण्ड का पालन करने से हमेशा ही मना किया है, और ऐसा क्यों किया ये मैं आपको अपने आगामी लेखों में जरूर बताऊंगा।

तिब्बती बौद्ध धर्म के धर्म गुरु दलाई लामा ने भी अक्सर कहा है, "यदि आप पाते हैं कि बुद्ध की शिक्षाएं आपके अनुरूप हैं, केवल तभी आप बुद्ध की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें, अन्यथा नहीं"।
और स्वयं गौतम बुद्ध ने कहा है, "मैं जो कुछ भी कहता हूं, उसे सच न मानें क्योंकि ये मैंने कहा है इसके बजाय आप इसका परीक्षण स्वयं करें, क्योंकि जिस तरह किसी के कह देने मात्र से कोई वस्तु सोने (स्वर्ण) की नहीं हो सकती, अपितु स्वर्ण का भी परीक्षण आवश्यक होता है। यदि मेरी शिक्षाओं के परीक्षण के पश्चात आप पाते हैं कि ये शिक्षाएं सही एवं सत्य हैं, तभी आप इन्हें अभ्यास करें और इसलिए बिल्कुल न करें क्योंकि आप मेरा सम्मान करते हैं।"

इस तरह बुद्ध ने हमें हमारी बौद्धिक क्षमता से स्वयं बुद्ध का परीक्षण करने की इजाज़त दे डाली। और इसीलिए बहुत से बौद्ध शिक्षक आपको अपने बैद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक क्षमताओं का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करते हैं, न कि अंध विश्वास करने के लिए।
इस तरह बौद्ध धर्म आपको किसी दिव्य शक्ति (परमेश्वर) को मानने के लिए बाध्य नहीं करता, बौद्ध धर्म ये नहीं कहता, कि एक बौद्ध (बुद्धिस्ट) होने के लिए आपको बुद्धिस्ट परिवार में जन्म लेना अनिवार्य है, बौद्ध धर्म ये नहीं कहता कि आप को धर्मांतरण करना अनिवार्य है। बुद्ध की शिक्षाएं या बौद्ध धर्म आपको वह मार्ग बताता है जिसपे चलके आप स्वयं एवं सम्पूर्ण प्राणी जगत का उद्धार कर सकते हैं। 
बुद्ध का मार्ग है मध्यम मार्ग, जिसपे चलने के लिए आपका मानव होना अनिवार्य है, चाहे आप किसी भी जाति, देश, बोली, भाषा, सिद्धांतवादी के क्यों न हो।

बौद्ध धर्म को जानने के लिए संक्षिप्त में आपको मैं गौतम बुद्ध के जीवन की कहानी अगले लेख में बताऊंगा, तत्पश्चात आपको बुद्ध के द्वारा खोजे गए मध्यम मार्ग, चार आर्य सत्य एवं उनकी अन्य शिक्षाओं की विस्तृत जानकारी आप मेरे लेखों में जान सकेंगे।

दोस्तों!
काफी समय से लिखना बंद सा हो जाने के कारण कुछ व्याकरण में गलती हो सकती है, या मेरे इस विषय को समझाने में गलतियां हो सकती हैं। कृपया कर इस संबंध में अपने कॉमेंट लिख कर मुझे सूचित जरूर करें।

- महेश "माही"

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