मिलिन्द प्रश्न

 नमो बुद्धाय!




मन भटक - भटक जाए 

पर बुद्ध की शरण में हर बार लौट आये


कुछ ऐसा ही महसूस हो रहा है आजकल, मन बार - बार भटक जा रहा है, पर फिर भी एक राह ऐसी है, जो हमेशा से ही अपने द्वार खोले हुई है और वह राह भगवान तथागत बुद्ध के धम्म की राह है। कई दिनों से काफी अलग - अलग तरह की किताबें पढ़ने की कोशिश कर रहा था, पर पता नहीं क्यों उन किताबों में आत्म संतुष्टि नहीं मिल रही थी। कुछ अच्छा सीखने की चाह शुरुआत और अंत में विचारों पर संयम रखने की सलाह देती है, और लगभग हर मोटिवेशनल किताब में लेखक ने इसी सिद्धांत को अपने-अपने तरीके से दोहराया है। जिसे आज से लगभग 2600 साल पहले तथागत बुद्ध ने दुनिया को बताया था।

इसी राह पर मैंने पिछले दिनों बौद्ध धम्म की एक अमूल्य पुस्तक "मिलिन्द पन्ह", जिसका अनुवाद पूजनीय भिक्खु जगदीश काश्यप जी ने किया है, पढ़ना आरम्भ किया है। किताब में आपको ऐसे छोटे-छोटे से प्रश्न जो कभी आपके मन में जरूर उठते होंगे उनका भी सटीक वर्णन किया गया है। जैसा कि हम जानते हैं कि आज कल बौद्ध धम्म अनुयायियों द्वारा स्वर्ग-नर्क, पुनर्जन्म, इंद्र, ब्रम्हा इत्यादि विषयों पर विश्वास करने से मना कर दिया जाता है परन्तु यदि आपने त्रिपिटक ग्रंथ में से यदि दीघ निकाय भी पढ़ा हो तो ये शब्द आपके लिए नए नहीं होंगे। और ऐसे ही कुछ विषय हैं जैसे कि बिना आत्मा के पुनर्जन्म कैसे? क्या बुद्ध सच में थे? क्या कर्मों के फल से नर्क प्राप्त होता है इत्यादि विषयों पर राजा मिलिन्द द्वारा थेर नागसेन जी से शास्त्रार्थ किया गया है। जिसमें कई प्रश्न आपको उपमाओं और उदाहरण के जरिये अच्छी तरह समझाए गए हैं। चूँकि राजा मिलिन्द अपने समय का बहुत ही ज्ञानी राजा था, उसने उस समय के कई प्रचलित धर्म ग्रंथ और दर्शनशास्त्र को भली भांति पढ़ा हुआ था अतः जिन प्रश्नों के उत्तर में व्यापक उदाहरण नहीं दिए या फिर कुछ कठिन शब्दों के साथ भन्ते नागसेन द्वारा प्रश्नों के उत्तर दिए हैं वहाँ मुझे असंतुष्टि हुई है। क्योंकि फिलहाल मैं बौद्ध धम्म के ज्ञान के मामले में नया ही हूँ और फिर इतनी जटिल शब्दावली के साथ किसी भी धार्मिक किताब को पढ़ना, थोड़ा तो मुश्किल हो ही जाता है। 

इसी श्रृंखला में इस ग्रंथ को आसान शब्दों में आपके समक्ष रखने का प्रयत्न कर रहा हूँ आशा है कि आप को पसंद जरूर आएगा। कृपया अपने कॉमेंट से मेरे इस प्रयास को सार्थक सिद्ध करने में मेरी मदद करें।

भवतु सब्ब मंगलं..।।


मिलिन्द प्रश्न की श्रृंखला पढ़ने के लिए क्लिक करें

1) मिलिन्द प्रश्न : प्रस्तावना (भाग 1)

2) मिलिन्द प्रश्न : प्रस्तावना (भाग 2)

3) मिलिन्द प्रश्न : पूर्व योग

4) मिलिन्द प्रश्न : राजा मिलिन्द की भेंट


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