मिलिन्द प्रश्न : (प्रस्तावना भाग 2)

 नमो बुद्धाय!



पिछले भाग में हमने जाना था कि राजा मिनांडर उर्फ मिलिन्द कितना बड़ा विद्या व्यसनी था, उसने तत्कालीन सभी ग्रंथों जैसे कि वेद, पुराण, दर्शन इत्यादि सभी विद्याओं का अध्ययन किया था। जिस कारण से वह दार्शनिक वाद-विवाद एवं शास्रार्थ करने में बहुत निपुण हो गया था। यहां तक कि उस समय के बड़े-बड़े दिग्गज पण्डित एवं विद्वान लोग भी उससे शास्रार्थ करने में भय मानते थे। राजा मिलिन्द की ज्ञान पिपासा को भिक्खु नागसेन के द्वारा दिये गए उपदेशात्मक उत्तरों से शांत किया। और उसी वादविवाद के फलस्वरूप हम इस ग्रंथ को पढ़ रहे हैं जिसका नाम मिलिन्द प्रश्न है।

मिलिन्द प्रश्न ग्रन्थ को किसने लिखा, इसके बारे में ग्रंथ में कहीं भी उल्लेख नहीं है। और न ही कोई भी विद्वान इस बारे में पता लगा पाया है। पाली के अतिरिक्त मिलिन्द प्रश्न का एक दूसरा संस्करण चीनी भाषा में भी मिलता है। चीनी भाषा में उक्त संस्करण का नाम "ना-से-पि-ब्कु-किन्" है, जिसका अर्थ है - "नागसेन-भिक्खु-सुत्त"। भन्ते जगदीश काश्यप जी ने उक्त पुस्तक का एक चीनी पंडित की मदद से अंग्रेजी में अनुवाद किया है। चीनी संस्करण और पाली संस्करण में कुछ भिन्नताएं और कुछ समानताएं हैं। जिसका वर्णन आपको भिक्खु जगदीश काश्यप जी द्वारा अनुवादित "मिलिन्द पन्ह" पुस्तक में मिलेगा। 

मिलिन्द प्रश्न ग्रंथ को कुल 6 परिच्छेदों में बांटा गया है -

1) पूर्व योग

2) मिलिन्द प्रश्न (लक्षण प्रश्न)

3) विमतिच्छेदन प्रश्न

4) मेण्डक प्रश्न

5) अनुमान प्रश्न

6) उपमा कथा प्रश्न

प्रथम परिच्छेद अर्थात पूर्व योग में आपको राजा मिलिन्द और भिक्खु नागसेन के पूर्व जन्म की कथा तथा मिलिन्द एवं भिक्खु नागसेन की पहली भेंट के प्रसंग पढ़ने मिलेंगे। इसके पश्चात के सभी परिच्छेदों में आपको जीवन, दर्शन, बौद्ध धम्म इत्यादि से संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर मिलेंगे। जो राजा मिलिन्द की तरह आपकी ज्ञान पिपासा को भी शांत करेंगे।

इस लेख के अगले भाग में आपको प्रथम परिच्छेद : पूर्व योग की कथा का विवरण पढ़ने को मिलेगा।

भवतु सब्ब मंगलं।

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