बौद्ध धम्म में प्रचलित अति महत्वपूर्ण बातें (Important and essential things in Buddhism)



नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ।।

बौद्ध धम्म में प्रचलित अति महत्वपूर्ण बातें - 

1.तीन रत्न (The Triple Gems)
2.पंच शील (The Five Principles)
3.चार आर्य सत्य (The Four Noble Truth )
4.आठ अष्टांगिक मार्ग (The Eightfold Path)
5. दस पारमिता (The Ten Perfections)
6.अड़तीस मंगल कर्म (Wisdom/ Blessings)

त्रिरत्न (Triple Gems)- बुद्ध, धम्म, संघ 
      बुद्धं सरणं गच्छामि।
      धम्मं सरणं गच्छामि।
      संघं सरणं गच्छामि।

चार आर्य सत्य (Four Noble Truth)

1. दुनिया में दु:ख है।
    The Truth of Suffering.
2. दु:ख का कारण है।
    The Truth of Cause of Suffering.
3. दु:ख का निवारण है।
    The Truth of End of Suffering.
4. दु:ख के निवारण का उपाय है।
    Truth of the Path to end of Suffering.


पंचशील.... The Five Principles (Morality)

1. पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि।

2. अदिन्नदाना वेरमणी सिक्खापदं समादयामि।

3. कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादयामि।

4. मुसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि।

5. सुरय मेरय मज्ज पमादट्ठाना वेरमणी सिक्खापदं समादयामि।


      आठ आष्टांगिक मार्ग (The Eight Fold Path)

1.सम्यक दृष्टि (सही दृष्टिकोण).(Right View )
2.सम्यक संकल्प..(Right Intention)
3.सम्यक वाणी..(Right Speech)
4.सम्यक कर्मांत..(Right Action)
5. सम्यक आजीविका. (Right Livelihood )
6. सम्यक व्यायाम . (Right Effort)
7. सम्यक स्मृति..(Right Awareness)
8. सम्यक समाधि. (Right Concentration )


        दस पारमिता- Perfections
(The Noble Characters/ Qualities)

1.दान पारमिता - उदारता पूर्ण दान करना 
2 .शील पारमिता-  मन,वाणी, शरीर से कुशल कर्म करना 
3. नैष्क्रम्य पारमिता - महान त्याग करना
4. प्रज्ञा पारमिता - जानना, सत्य का ज्ञान 
5. वीर्य पारमिता - आलस्यहीन हो, दृढशक्ति 
6. क्षांति पारमिता - खांति, सहनशीलता
7.सत्य पारमिता-  सम्यक दृष्टि, सही दृष्टिकोण 
8.अधिष्ठान पारमिता-  दृढ़ संकल्प से संपादन 
9 .मैत्री पारमिता -  सभी प्राणियों से मैत्री भाव 
10.उपेक्खा पारमिता-  उपेक्षा, पक्षपात रहित भाव


बुद्ध द्वारा बताए 38 मंगल कर्म - महामंगलसुत्त 

1.मूर्खों की संगति नहीं करना।
2. बुद्धिमानों की संगति करना। 
3. शीलवानों की संगति करना। 
4. अनुकूल स्थानों में निवास करना। 
5. कुशल कर्मों का संचय करना। 
6. कुशल कर्मों में लग जाना। 
7. अधिकतम ज्ञान का संचय करना। 
8. तकनीकी विद्या, शिल्प सीखना। 
9. व्यवहार कुशल एवं विनम्र होना। 
10. विवेकवान होना। 
11. प्रभावशाली वक्ता होना। 
12. माता पिता की सेवा करना। 
13. परिवार का पालन पोषण करना।
14. अकुशल कर्मों को ना करना। 
15. बिना किसी अपेक्षा के दान देना
16. धम्म का आचरण करना। 
17. रिश्तेदारों का आदर सत्कार करना। 
18. कल्याणकारी कार्य करना। 
19. मन, शरीर तथा वचन से पर पीड़क कार्य ना करना। 
20. नशीली चीजों का सेवन न करना। 
21.धम्म के कार्यों में तत्पर रहना। 
22.गौरवशाली व्यक्तित्व बनाए रखना। 
23. विनम्रता बनाए रखना। 
24. पूरी तरह से संतुष्ट होना. तृप्त होना। 
25. कृतज्ञता कायम रखना। 
26. समय समय पर धम्म चर्चा करना।
27. क्षमाशील होना। 
28. आज्ञाकारी होना। 
29. भिक्षुओ, शीलवान लोगों का दर्शन करना। 
30. मन को एकाग्र करना। 
31. विपस्सना से मन निर्मल करना। 
32. सतत जागरूकता बनाए रखना ।
33. पाँच शीलों का पालन करना। 
34. चार आर्य सत्यों का दर्शन करना 
35. आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलना। 
36. निर्वाण का साक्षात्कार करना। 
37. लोक धम्म, लाभ हानि, यश अपयश, सुख-दुख, जय-पराजय से विचलित नहीं होना। 
38. शोक रहित, निर्मल एवं निर्भय होना। 
        सबका मंगल हो....सभी प्राणी सुखी हो

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