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Showing posts from October, 2023

मिलिन्द प्रश्न : भन्ते नागसेन का जन्म

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नमो बुद्धाय! पिछले अध्याय में हमने पढ़ा था कि देवपुत्र महासेन को आयुष्मान अस्सगुत्त और अन्य देवताओं एवं भिक्खुओं के द्वारा मनुष्य लोक में जन्म हेतु आग्रह किया गया और भिक्खु संघ की बैठक में शामिल न होने पर आयुष्मान रोहण को बालक नागसेन की प्रव्रज्या तक के लिए दण्ड कर्म का आदेश दिया गया था।  फिर आयुष्मान रोहण दण्ड कर्म आदेश अनुसार हिमालय पर्वत के पास के कजंगल गांव में गए और दण्ड कर्म अनुसार प्रतिदिन सोनुत्तर ब्राम्हण के घर पर  भिक्षाटन के लिए जाने लगे। शुरुआत में कई वर्षों तक उन्हें ब्राम्हण के घर से कोई भिक्षाटन प्राप्त नहीं हुआ और न ही किसी ने "आगे जाओ" ऐसे शब्द कह कर उन्हें बोला।  दस माह बीतने पर ब्राम्हण के घर एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम नागसेन रखा गया। धीरे - धीरे वह बालक 7 वर्ष का हो गया। तब उसके पिता ने उसे कहा, " प्रिय नागसेन! इस ब्राम्हण कुल की जो शिक्षाएं हैं तुम्हें उन्हें सीखना चाहिए।" बालक नागसेन ने कहा, "तात! इस ब्राम्हण कुल की कौन सी शिक्षाएं हैं?" "प्रिय नागसेन! तीनों वेद और दूसरे शिल्प - ये ही शिक्षाएं हैं।" "तात! मैं सभी शि...

मिलिन्द प्रश्न : राजा मिलिन्द की भेंट

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  नमो बुद्धाय! मित्रों! पिछले भाग में हमने राजा मिलिन्द और भन्ते नागसेन के पूर्व जन्म की गाथा को पढ़ा था। अब हम राजा मिलिन्द, जो कि विद्या व्यसनी था और अपनी ज्ञान पिपासा को मिटाने हेतु हमेशा आतुर रहता था, की तत्कालीन विद्वान व्यक्तियों से भेंट की गाथा सुनेंगे। कहा जाता है कि राजा मिलिन्द के पास अनंत सेना थी, अतः एक दिन राजा मिलिन्द अपनी चतुरंगिणी अनन्त सेना को देखने के अभिप्राय से नगर के बाहर गया। सेनाओं की गणना करने के बाद उस वाद-प्रिय राजा ने लोकायत और वितण्डवादियों (इनके मतानुसार स्वर्ग और नर्क कुछ नहीं होता है, ये पूर्णतः यथार्थवादी थे, ये संसार को ही सब कुछ मानते थे। इनके किसी भी बात का प्रत्यक्ष प्रमाण ही एक मात्र प्रमाण होता था) से तर्क करने की उत्सुकता से ऊपर सूर्य की ओर देखा, और अपने अमात्यों (मंत्रियों) को सम्बोधित किया- "अभी बहुत दिन बाकी है। तब तक क्‍या करना चाहिये?क्‍या ऐसा कोई पण्डित सम्यक्‌ - सम्बुद्ध के सिद्धान्तों को जानने वाला श्रमण, ब्राह्मण या गणाचार्य है, जिसके साथ में नगर में जाकर वार्तालाप करूँ, जो मेरी शंकाओं को दूर कर सके ?” राजा के द्वारा ऐसा कहने पर पाँच ...

मिलिन्द प्रश्न : पूर्व योग

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नमो बुद्धाय!   आज हम मिलिन्द प्रश्न ग्रंथ के मूल अध्याय को पढ़ेंगे। जैसा कि पिछले अध्यायों में हमने बताया कि मिलिन्द प्रश्न ग्रंथ का एक चीनी संस्करण भी है अतः चीनी संस्करण में दिए गए पूर्व योग और पाली संस्करण के पूर्व योग दोनों का उल्लेख इस भाग में किया जाएगा। परंतु सबसे पहले पाली ग्रंथ अनुसार पूर्व योग पढ़ते हैं।   पूर्व योग का अर्थ है उनके पूर्व जन्म में किये गए कर्म। जैसा कि आप जानते हैं कि बौद्ध धम्म के त्रिपिटक ग्रंथों में पूर्व जन्म का उल्लेख किया गया है और जातक कथाएं भी भगवान गौतम बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाओं पर आधारित है। अतः ये कहा जाना कि पूर्व जन्म और कर्मो के फल जैसी कोई चीज नहीं होती गलत ही होगा। पूर्व योग में मिनांडर और भन्ते नागसेन जी के पूर्व जन्म की कथा का वर्णन मिलता है। उस समय वे भगवान काश्यप बुद्ध के शासन काल में पृथ्वी पर मानव योनि में जन्म लिए थे। भगवान काश्यप बुद्ध के शासन काल में गंगा नदी के समीप, एक आश्रम में, एक बड़ा भिक्खु संघ रहता था।वहाँ व्रत और शील सम्पन्न भिक्खु रहा करते थे, जो कि प्रातः काल ही उठ कर अपने आश्रम में साफ सफाई कर बुद्ध के ज्ञान का ध्...

मिलिन्द प्रश्न : (प्रस्तावना भाग 2)

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  नमो बुद्धाय! पिछले भाग में हमने जाना था कि राजा मिनांडर उर्फ मिलिन्द कितना बड़ा विद्या व्यसनी था, उसने तत्कालीन सभी ग्रंथों जैसे कि वेद, पुराण, दर्शन इत्यादि सभी विद्याओं का अध्ययन किया था। जिस कारण से वह दार्शनिक वाद-विवाद एवं शास्रार्थ करने में बहुत निपुण हो गया था। यहां तक कि उस समय के बड़े-बड़े दिग्गज पण्डित एवं विद्वान लोग भी उससे शास्रार्थ करने में भय मानते थे। राजा मिलिन्द की ज्ञान पिपासा को भिक्खु नागसेन के द्वारा दिये गए उपदेशात्मक उत्तरों से शांत किया। और उसी वादविवाद के फलस्वरूप हम इस ग्रंथ को पढ़ रहे हैं जिसका नाम मिलिन्द प्रश्न है। मिलिन्द प्रश्न ग्रन्थ को किसने लिखा, इसके बारे में ग्रंथ में कहीं भी उल्लेख नहीं है। और न ही कोई भी विद्वान इस बारे में पता लगा पाया है। पाली के अतिरिक्त मिलिन्द प्रश्न का एक दूसरा संस्करण चीनी भाषा में भी मिलता है। चीनी भाषा में उक्त संस्करण का नाम "ना-से-पि-ब्कु-किन्" है, जिसका अर्थ है - "नागसेन-भिक्खु-सुत्त"। भन्ते जगदीश काश्यप जी ने उक्त पुस्तक का एक चीनी पंडित की मदद से अंग्रेजी में अनुवाद किया है। चीनी संस्करण और पाली संस...