मिलिन्द प्रश्न : भन्ते नागसेन का जन्म
नमो बुद्धाय! पिछले अध्याय में हमने पढ़ा था कि देवपुत्र महासेन को आयुष्मान अस्सगुत्त और अन्य देवताओं एवं भिक्खुओं के द्वारा मनुष्य लोक में जन्म हेतु आग्रह किया गया और भिक्खु संघ की बैठक में शामिल न होने पर आयुष्मान रोहण को बालक नागसेन की प्रव्रज्या तक के लिए दण्ड कर्म का आदेश दिया गया था। फिर आयुष्मान रोहण दण्ड कर्म आदेश अनुसार हिमालय पर्वत के पास के कजंगल गांव में गए और दण्ड कर्म अनुसार प्रतिदिन सोनुत्तर ब्राम्हण के घर पर भिक्षाटन के लिए जाने लगे। शुरुआत में कई वर्षों तक उन्हें ब्राम्हण के घर से कोई भिक्षाटन प्राप्त नहीं हुआ और न ही किसी ने "आगे जाओ" ऐसे शब्द कह कर उन्हें बोला। दस माह बीतने पर ब्राम्हण के घर एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम नागसेन रखा गया। धीरे - धीरे वह बालक 7 वर्ष का हो गया। तब उसके पिता ने उसे कहा, " प्रिय नागसेन! इस ब्राम्हण कुल की जो शिक्षाएं हैं तुम्हें उन्हें सीखना चाहिए।" बालक नागसेन ने कहा, "तात! इस ब्राम्हण कुल की कौन सी शिक्षाएं हैं?" "प्रिय नागसेन! तीनों वेद और दूसरे शिल्प - ये ही शिक्षाएं हैं।" "तात! मैं सभी शि...