सम्यक लेखन : एक नई पहल (Samyak Lekhan: A beginning)

नमो बुद्धाय!

दोस्तों! काफी समय बाद एक नए ब्लॉग के साथ फिर हिन्दी ब्लॉगिंग जगत के दरवाजे पर खड़ा हुआ हूँ। पर,
"सम्यक लेखन", एक और नया ब्लॉग..
वो भी इतने दिनों बाद, आखिर क्यों..?
ये सवाल जरूर आपके मन में जरूर आया होगा, यदि आप मेरे पुराने पाठकों में से एक होंगे तो...। वैसे मैंने शुरुआत से ही हिन्दी ब्लॉगिंग को आगे बढ़ाने की बात कही है, जिस पर मैंने अपने ब्लॉग जगत के तत्कालीन जाने माने हिन्दी ब्लॉगर्स के साथ मिल कर "हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड" नामक ब्लॉग की शुरुआत भी की थी। पर समय का पहिया ऐसा घूमा कि मैंने लिखना बंद सा ही कर दिया। हालांकि लिखता तो मैं अब भी हूँ पर अब ब्लॉगिंग नहीं करता। पर एक कसक सी थी कि ब्लॉगिंग छोड़ के मैंने शायद गलत किया है, उस ही गलती को सुधारने और अपनी तेज गति से भागती ज़िन्दगी में आध्यात्म के सहारे ठहराव लाने की एक कोशिश में आज फिर एक नए ब्लॉग के साथ आपके सामने आया हूँ।
"सम्यक लेखन", इसमें "सम्यक" शब्द का अर्थ है "सही"।
और इस ब्लॉग के एड्रेस (samyakbuddhism.blogspot.com) से आप समझ ही गए होंगे कि इस दफा मैं जो लिखने आया हूँ, वो कुछ भी तो नहीं होगा। जी हाँ! मैं इस बार बुद्ध धम्म (धर्म) से संबंधित अपने अब तक के अर्जित ज्ञान के बारे में इन ब्लॉग में लिखने की कोशिश करूँगा। आशा है आप मेरे विचारों से सहमत जरूर होंगे।

अब सवाल उठता है कि बुद्ध धर्म ही क्यों..?
इसका भी जवाब है मेरे पास, जो कि मैं आगामी पोस्ट में जरूर बताऊंगा। अभी तो बस इतना कहना चाहता हूँ कि बुद्ध धर्म में मन एवं चित्त को शांत करने का जो रहस्य छुपा हुआ है, वो शायद किसी और धर्म में नहीं होगा। क्षमा कीजियेगा, मैं यहां किसी भी धर्म विशेष की बुराई अथवा आलोचना नहीं करूँगा पर जो मैंने बुद्ध धर्म में सीखा है, वो आपके समक्ष रखना भी मेरी ही नैतिक जिम्मेदारी है। जो इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपके समक्ष आगामी दिनों में रखता जाऊँगा।
और एक बात और कहना चाहता हूँ, कि बुद्ध धर्म को जानने के लिए जब मैंने इंटरनेट का सहारा लिया तो मुझे थोड़ा दुख हुआ कि बुद्ध धर्म के लिए हिन्दी भाषा में इंग्लिश की अपेक्षा साहित्य कम ही है। तो बस इसीलिए एक नई पहल करना मेरे लिए आसान हो गया।
इस नई पहल के लिए आप सभी की शुभकामनाओं के साथ मैं अगली पोस्ट के साथ फिर आपसे मिलूंगा, तब तक के लिए.. आप सभी को नव वर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं..।

आपका वही पुराना दोस्त
- महेश "माही"

Comments

  1. धर्म हमेशा ही पाठकों के लिए एक कौतूहल का विषय रहा है । स्वागत है आपका और अभिनंदन भी, इतना सुंदर विषय चुनने के लिए। साथ ही अगले लेख की प्रतीक्षा भी है ताकि इतने शान्त और सुंदर धर्म की गहराई में उतरकर आप, हम पाठकों के लिए कुछ मोती ला सकेंं।

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    1. आभार आपका,तथा स्वागत है मेरे पुनः लेखन में सहयोगी बनने के लिए।

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